Echogenic Focus क्या होता है ? इलाज कैसे कराये ? कोनसे टेस्ट कराये ?

Echogenic Focus क्या होता है ? इलाज कैसे कराये ? कोनसे टेस्ट कराये ?
Echogenic Focus
Echogenic Focus

Echogenic Focus ( इकोजेनिक फोकस ) क्या होता है ?

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) गर्भावस्था की एक एसी अवस्था को कहा जाता है जिसमे गर्भवती महिला के पेट में जो बच्चा पल रहा होता है उसके हृदय में कुछ सफ़ेद धब्बे दिखाई देते ये धब्बे गर्भावस्था अल्ट्रासाउंड के दौरान दिखाई देते है जिन्हें कैल्शियम के धब्बे भी कहते है | दुसरे शब्दों में दिल के बाएं वेंट्रिकल में छोटे प्रतिध्वनिजनक फोकस को ही मेडिकल की भाषा में echogenic focus कहा जाता है |

दिल के बाएं वेंट्रिकल में छोटे प्रतिध्वनिजनक फोकस ज्यादातर महिलाओ में प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में जो अल्ट्रासाउंड कराया जाता है उसमे इस कंडीशन का पता चलता है दूसरी तिमाही के अल्ट्रासाउंड को लेवल 2 अल्ट्रासाउंड कहा जाता है उसी में Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) का पता चलता है शोर्ट में इस कंडीशन को EIF भी कहा जाता है इसका दूसरा नाम कार्डियकएकोजेनिक फोकस (cardiac echogenic focus ) भी है |

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) एक एसी कंडीशन होती है जिसमे गर्भ में पल रहे बच्चे में अनुवांशिक परेशानी या chromosom डिफेक्ट होने का खतरा भी बढ़ जाता है इसलिए इन सबकी पुष्टि के लिए आगे और टेस्ट कराने की जरुरत होती है ताकि बच्चे की सही अवस्था और स्वास्थ्य का पता लगाया जा सके | ज्यादातर मामलो में Echogenic Focus एक नार्मल कंडीशन को ही कहा जाता है जो प्रेगनेंसी में ली जाने वाली दवाइयों और शरीर में स्त्रावित होने वाले हारमोंस की वजह से पैदा होती है पर अगर Echogenic Focus के साथ में प्रेगनेंसी में और भी कोई रिस्क होती है तो आगे टेस्ट कराये जाने जरूरी होते है |

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ये एक नार्मल प्रेगनेंसी का पार्ट होता है और इससे बच्चे को कोई नुक्सान नहीं होता है पर अगर इसके साथ किसी और प्रॉब्लम जैसे जेनेटिक या IUGR (Intrauterine Growth Restriction) जैसी कंडीशन का भी पता चलता है तो प्रेगनेंसी रिस्की मानी जाती है और डॉक्टर की सलाह पर आगे और टेस्ट व् ट्रीटमेंट कराये जाते है ताकि होने वाले बच्चे को कोई नुकसान न हो |

कई महिलाओ में Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) आगे के अल्ट्रासाउंड में जैसे तीसरे तिमाही में गायब हो जाता है पर अगर एसा नहीं होता है तो भी घबराने की कोई बात नहीं होती है क्युकी बच्चा पैदा होने के बाद ये प्रॉब्लम पूरी तरह से ठीक हो जाती है यानि की इकोजेनिक फोकस बच्चे के पैदा होने के बाद ठीक हो जाता है और इससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है फिर भी आप डॉक्टर से कन्फर्म कर सकते है |

अगर दी गई जानकारी को डिटेल में विडियो के माध्यम देखना चाहते है तो नीचे दिए गए विडियो को देखे |

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) के लक्षण :-

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) यानि EIF गर्भावस्था में पाई जाने वाली एक कॉमन समस्या होती है जिससे माँ और बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है पर अगर लक्षण की बात करे तो इस समस्या का ऊपर से देखने पर कुछ पता नहीं चलता है यानि की इसका कोई लक्षण नहीं होता है न ही इससे कोई नुकसान होता है |

Echogenic Focus (एकोजेनिक फोकस ) का कारण:-

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) गर्भवती महिला के शरीर में कैल्शियम की अधिक मात्रा की वजह से हो सकता है जिसके कारण शरीर में मुख्यतः बच्चे के हार्ट की मसल्स पे कैल्शियम इकठा हो जाता है और वो अल्ट्रासाउंड कराते समय चमकदार सफ़ेद धब्बो के रूप में दिखाई देता है हालाँकि डॉक्टर या एक्सपर्ट द्वारा इसका मुख्य कारण नहीं बताया जाता है पर प्रेगनेंसी के समय दी जाने वाली कैल्शियम की गोलियों की वजह से कैल्शियम ज्यादा होने की सम्भावना होती है |

हालाँकि इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है की Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) की वजह से आप दवाइया लेना बंद कर दे या इसके बारे में सोचकर परेशां रहे, बल्कि इससे माँ और बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है इसलिए खुश रहे ताकि आपका बच्चा स्वस्थ रहे |

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) पर मेरी प्रेगनेंसी की स्टोरी जानने के लिए क्लिक करे |

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) :- पता लगने पर क्या करे ?

हालाँकि Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) हार्मफुल नहीं होता है पर अगर आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में ये लिखा है तो सबसे पहले अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करे डॉक्टर आपकी रिपोर्ट के हिसाब से आगे क्या टेस्ट करने है इसके बारे में बतायेगे , अगर ये प्रॉब्लम आपके लिए ईएसआई है जिसमे घबराने की बात नहीं है तो आपको कुछ नहीं करना होगा |

परन्तु अगर इस प्रॉब्लम के साथ किसी जेनेटिक प्रॉब्लम होने का डर होता है या फिर पहले कभी आपके माता पिता या पहली संतानों में किसी जेनेटिक प्रॉब्लम का पता चला हो तो ये परेशानी बढ़ी हो सकती है और इसके लिए डॉक्टर गर्भवती माता और पिता दोनों की ही टेस्टिंग करवा सकते है

इसके लिए जो टेस्ट कराये जाते है उसका नाम है Noninvasive prenatal testing (NIPT) जिसका दूसरा नाम noninvasive prenatal screening (NIPS) टेस्ट भी है | ये टेस्ट होने वाले बच्चे में किसी तरह की अनुवांशिक बीमारी का पता लगाने के लिए होता है इसके लिए गर्भवती महिला के शरीर से खून का सैंपल लिया जाता है और उससे डीएनए की जांच की जाती है | कई केसेस में पिता के खून का सैंपल भी लिया जा सकता है | Echogenic Focus (एकोजेनिक फोकस ) की वजह से बच्चे में अनुवांशिक परेशानी होने का खतरा हो सकता है इसकी पुष्टि के लिए ये टेस्ट कराया जाता है |

Echogenic Focus (इकोजेनिक फोकस ) मेने कोनसे टेस्ट कराये थे ? विडियो में देखे

इलाज कैसे करवाए?

Echogenic Focus (एकोजेनिक फोकस ) का मेडिकल के क्षेत्र में कोई इलाज नहीं है | समय के साथ ये अपने आप ही ठीक हो जाता है और बच्चे के पैदा होने के बाद ये परेशानी नहीं रहती है इसलिए इसके लिए चिता करने की कोई जरुरत नहीं होती है बस गर्भावस्था के दौरान कुछ जरूरी बातो का ध्यान रखे जैसे :-

  • एक्सेरसाइज अधिक करे
  • पानी ज्यादा से ज्यादा पिए
  • दवाइया समय पर ले
  • अच्छा और हेल्थी खाना खाए
  • डॉक्टर के अनुसार चले

विडियो के माध्यम से देखे |

अगर ऊपर दी गई जानकारी को डिटेल में विडियो के माध्यम देखना चाहते है तो नीचे दिए गए विडियो को देखे |

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